पूर्वजों की पुण्यभूमि पर आत्मा को छू लेने वाली एक अविस्मरणीय यात्रा…

कल का दिन मेरे जीवन में एक ऐसा अध्याय बन गया जिसे शब्दों में बांध पाना शायद संभव नहीं। अपने आदरणीय पिताजी और छोटे भाई श्री पंकज पाण्डेय जी के साथ जब हम सब अपने पूर्वजों की जनपद गोरखपुर के ग्रामसभा चारपानी बुज़ुर्ग की पावन भूमि पर पहुँचे, तो ऐसा लगा मानो वर्षों से बिछड़ा हुआ कोई आत्मिक संबंध फिर से जीवित हो उठा हो।
हर कदम पर मन श्रद्धा से झुकता रहा और हृदय बार-बार उस धरती को नमन करता रहा, जहाँ हमारे पूर्वजों की साँसे कभी गूंजी होंगी।

यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह हमारे अस्तित्व की जड़ों तक पहुँचने का अवसर था।
जब हमने अपने कुल के बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया और छोटों से आत्मीय परिचय हुआ, तो वह स्पर्श केवल भौतिक नहीं, बल्कि आत्मा के स्तर पर एक गहरा मिलन था।
और फिर, कुलदेवी कोलहट माँ चतुर्भुजा देवी के पावन दर्शन और पूजन करते समय जो दिव्यता का अनुभव हुआ — मानो सम्पूर्ण वंश का आशीर्वाद एक साथ हमारे सिर पर उतर आया हो।

अपने पूर्वजों के परिवारीजनों के द्वारा किया गया स्वागत, वह स्नेहिल मुस्कानें, आत्मीय मिलन, और आंखों में छलकता अपनत्व — इन सबने मन को इतना भावुक कर दिया कि शब्द गले में अटक गए।
यह अनुभव सिर्फ मेहमाननवाज़ी नहीं था, यह अपनेपन का जीवंत प्रमाण था। लग रहा था जैसे वर्षों से प्रतीक्षित संतति लौट आई हो और गाँव ने अपने खोए हुए पुत्र को फिर से हृदय से लगा लिया हो।

यह मेरे लिए केवल एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं थी — यह उन पाँच-छः पीढ़ियों से पुनः जुड़ने का अवसर था जिन्होंने कभी इस धरती को अपना घर कहा और फिर अयोध्या की ओर प्रस्थान किया। हमारे मन में वर्षों से एक तीव्र आकांक्षा थी कि हम एक बार इस पुण्यभूमि पर अवश्य जाएं और अपने पुरखों की स्मृतियों को प्रणाम करें। आज वह आकांक्षा पूरी हुई — और वह क्षण जब पिताजी, पंकज और मैं साथ खड़े थे, उस धरती पर जिसने हमारी जड़ों को संजो कर रखा था — वह भाव कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।

इस शुभ अवसर पर श्री गिरिजेश पांडेय जी, श्रीमती सुधा पाण्डेय (प्रधान), श्री आनंद कुमार पांडेय जी, श्री रजनीश पाण्डेय जी, श्री जगन्नाथ पाण्डेय जी, श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय जी, श्री नारायण पाण्डेय जी, श्री आदित्य पाण्डेय जी, श्री राजन पाण्डेय जी, श्री रमाकान्त त्रिपाठी जी, श्री रामप्रगट पाण्डेय जी, श्री नवरत्न पाण्डेय जी, श्री चन्द्रकेश तिवारी जी सहित अनेक सम्मानित परिवारजन एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। आप सभी महानुभावों का आत्मीय प्रेम, स्नेहिल व्यवहार और हृदयस्पर्शी अपनत्व ने इस यात्रा को एक अनमोल स्मृति बना दिया।

मैं पूरे मन, आत्मा और श्रद्धा से आप सभी का कोटिशः आभार प्रकट करता हूँ। आपके द्वारा दिया गया यह प्रेम, यह आशीर्वाद, और यह अपनत्व — मेरे जीवन की सबसे बड़ी निधि बनकर रहेगा। पूर्वजों की पुण्यभूमि से मिली यह आत्मीयता और आध्यात्मिक ऊर्जा सदा मेरे जीवन को दिशा देती रहेगी।

3 Comments

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